मैं समझता हूँ

” डैड! आई लव सुप्रिया ” बेटी कि आवाज़ ने जैसे उसे अतीत के किसी खोये हुए कोने में धकेल दिया था। वो अतीत जो इतने उपचारों और तिरस्कारों के बाद अब काल्पनिक सा महसूस होता है।
अपनी पहली मँगनी से 4 दिन पहले कि वो रात जब अनिल ने उससे भीख मांगी कि वो अपने पिताजी से बात करे। दुनिया कि नज़रों में उनका रिश्ता भले ही गुनाह था, पर उस रिश्ते ने उसे इतनी ताक़त दी थी कि वो अपने आप को अपना सके. उसके पिताजी अपने गुस्से के लिए कॉलोनी भर में मशहूर थे, निसंदेह उस तमाचे कि छाप ने उसके साहस को बेतरतीब कर दिया।

अब उस तमाचे कि आवाज़ इस पल में गूँज रही थी। मेज़ पर लगा खाना ठंडा हो चुका था और उसपे पसरा हुआ मौन जैसे उसकी पत्नी कि सिसकियों और उसकी बेटी के स्पंदन के सामने डटा हुआ था ।
उसने प्यार भरी नज़र से बेटी को देखा और कुछ ऐसा कहा जो शायद आज से ३० साल पहले अगर उसके पिताजी ने उससे कहा होता तो उसे वो सहारा मिल गया होता जिसके अभाव में उस जैसे कई लोग जिंदगियाँ गुनहगारों कि तरह काट देते हैं।

“मैं समझता हूँ”

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About Dimple Negi

sees the world from her own tinted sunglasses, loves reading and is fearless to the point of being neurotic sometimes. The peculiar work title comes from the ability of never being able to sit calmly and always looking for ideas and inspirations in everyday life. When not buried in a pile of books or writing off the hook, you will mostly find her on street with a camera and her beloved cat 'Tipsy'

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