काश तुम भी समझ पाते

काश तुम….  मै क्या सोचता हूँ, क्या महसूस करता हूँ, जी होती अगर मेरी जिन्दगी, देखी होती अगर गरीबी, भूखे पेट अगर तुम भी सोये होते, तपती गर्मी मे नंगे पैर मीलों चले होते,   बारिश मे अगर बिन छ्त्त सोये होते, और सर्दी मे नंगे बदन रोये होते, तो…

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सोमदेव

“अबे ओ सोमी , इधर आ” , उस कड़कदार आवाज़ ने, सड़क पे जाते एक अधेड़ व्यक्ति को एकदम से रोक दिया. “ये सामान जरा ऊपर तक पहुंचवा दे, इस मतई के शरीर में तो जैसे जान ही नहीं है” भजनलाल अपने नौकर मतई की ओर आंखे तरेरते हुए बोले.…

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