आज मेरी नातिन ने
मुझसे पूछ लिए कई यक्ष प्रश्न
नाना ये टोपीवाले अंकल लोग
क्या मांगने आते हैं
स्वीटी के घर भी गए थे
पर कोई उन्हें कुछ देता क्यों नहीं
मैंने इस बार तो जवाब दे दिया
देते हैं बेटा, वही-
जो ये नेता लोग सबको देते हैं – आश्वाशन
फिर उसने पूछा
आप टीवी पर न्यूज़ देखते रहते हैं
हर चैनल पर
एक ही न्यूज़ तो होती है पर
सभी कहते हैं की हम
इस न्यूज़ को पहली बार दिखा रहे हैं
सभी इसे अपना एक्सक्लूसिव बताते है.
क्या हमारे टीचर हमें गलत सिखाते है?
मैं चुप रहा
अच्छा नाना, नाराज़ न हों तो एक बात पूँछू
मेरे अभयदान पर बोली
नानी बाजार जाने से पहले आपसे
इतने सारे पैसे क्यों लेती हैं?
क्या मेरी टाफी और चाकलेट
बहुत महँगी होती है?
अगर ऐसा है तो हम आजसे
टाफी और चाकलेट नहीं खायेंगे
अब मेरे सब्र का बाँध टूट गया
और मैं रो पड़ा, उसे गोंद में उठा लिया
नन्ही जान मेरे आंसू पोंछ रही थी
और मुझे एक पर एक छूट देरही थी
और मैं धंसता जा रहा था
मँहगाई की कब्र में
उसने मुझे खूब प्यार किया और
किसी तरह हँसाया क्योंकि
उसके मन में अभी भी
बहुत से अनुत्तरित प्रश्न थे
नाना जी, कल स्वीटी की मम्मी ने
उसे स्कूल के लिए टिफिन नहीं दिया
उसकी मम्मी के पास पैसे नहीं हैं
उसके पापा सेना में थे
लड़ाई में मारे गए थे
उसके दादा रो रहे थे और
कह रहे थे – पेट्रोल पम्प देने को
कहा था सरकार ने
दो जून की रोटी का भी
जुगाड़ नहीं दिया
नाना ये सरकार कौन है
क्या आप उन्हें जानते हैं
सरकार अंकल से कहिये न
की स्वीटी के दादा को
खाना भेज दिया करें
उसी में स्वीटी भी खा लिया करेगी
बोलिए न आप जानते हैं
सरकार अंकल को
मैं चुप रहा
अच्छा नाना कल पंद्रह अगस्त है
हमारा स्वतंत्रता दिवस
टीवी पर दिखाते हैं
बहुत अच्छा लगता है
पर नाना, प्रधान मंत्री जी तो कहते हैं
हम बहुत ताकतवर हैं
पर खुद बुल्लेट प्रूफ केबिन में
क्यों खड़े होते हैं
किसी से डरते हैं क्या?
इतनी सुरक्षा में खड़े होकर
हमें सुरक्षित बताते हैं
नाना, बताइए न
क्या प्रधान मंत्री जी सच बोलते हैं?
मैं फिर चुप रहा.
~Shesh Dhar Tiwari
