नीयत

war-and-peace

सीमापार से गोलीबारी शुरू होते ही गुलफाम , उसके भाई बहन और माँ बाप उस बंकर नुमा गड्डे में छिप गए । पर ये क्या बकरियां आज खुले में ही बंधी रह गयीं । गुलफाम के माँ बाप एक दुसरे को इसके लिए दोषी ठहरा रहे थे । आखिर गुलफाम की माँ झल्ला कर बोली – ‘ खाने के वैसे ही लाले पड़े हैं अगर बकरी नहीं रही तो मेरे बच्चों को दूध भी नहीं मिलेगा … मैं जा रही हूँ उन्हें छिपाने ‘ …. गुलफाम का बाप बोला – ‘ रुक मैं भी आता हूँ ‘ …… दोनों ने मिलकर जल्दी से सभी बकरियों को आड़ में किया और गड्ढे की ओर वापस लौटने लगे । पर माँ को न जाने कहाँ से पड़ोसी रउफ का मेमना गोलीबारी से सहमा हुआ इधर उधर भागता दिखाई दिया । ‘ उसे आड़ में नहीं किया तो कही वो गोली के निशाने में न आ जाए ‘ ये सोच कर उसकी ओर बढ़ी ही थी एक गोली उसकी पीठ से घुसते हुए सीने से निकल गयी । वो बेजान क्षत विक्षत पडी थी गुलफाम का पिता रोष और शोक का सागर बना , रोते चीखते बच्चों को सम्हाले गड्ढे में खड़ा यही सोच रहा था ‘ अपने मजहब वालों की गोली ने भी नूरी की नीयत का लिहाज नहीं किया.

About कौशल

मै समय की रेत पर लिखा हुआ एक नाम हूं ।  व्योम सा विस्तृत कभी ,और कभी अणोरणीयान हूं ।।  मै चिरंतन इस जगत में पर आज भी अकृलाण्त हूं ।  कोटि-कोटि कल्पों से करता स्वयं का अनुसंधान हूं ॥  निकृष्टता का वरण मैने किया श्रेष्ठता के चरम को मैने छुआ तिमिर के तानूर से तारने को तिमिरारि सा दीप्यमान हूं ॥  मै समय की रेत पर लिखा हुआ एक नाम हूं ....

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