काश तुम भी समझ पाते

काश तुम….  मै क्या सोचता हूँ, क्या महसूस करता हूँ, जी होती अगर मेरी जिन्दगी, देखी होती अगर गरीबी, भूखे पेट अगर तुम भी सोये होते, तपती गर्मी मे नंगे पैर मीलों चले होते,   बारिश मे अगर बिन छ्त्त सोये होते, और सर्दी मे नंगे बदन रोये होते, तो…

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Tu Aam Sahi- तू आम सही पर अहम है|

(tu aam sahi) तू आम सही तू आम सही पर अहम है तू कुछ नही है ये वहम है ऐ जुल्म ओ सितम के आदी ये सब ज़ालिम तुझसे है तू कब तक इनको पालेगा इन सापों को कुचल दे नई नस्लों को अकल दे आजादी को अज़ल दे तू…

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