मै समय की रेत पर लिखा हुआ एक नाम हूं ।
व्योम सा विस्तृत कभी ,और कभी अणोरणीयान हूं ।।
मै चिरंतन इस जगत में पर आज भी अकृलाण्त हूं ।
कोटि-कोटि कल्पों से करता स्वयं का अनुसंधान हूं ॥
निकृष्टता का वरण मैने किया श्रेष्ठता के चरम को मैने छुआ
तिमिर के तानूर से तारने को तिमिरारि सा दीप्यमान हूं ॥
मै समय की रेत पर लिखा हुआ एक नाम हूं ....
तिरंगे की आत्म कथा अपने सामने लाखो करोड़ों लोगों को झुकते , अकड़ते , गर्व महसूस करते देखा है किसी के लिए भगवान किसी के लिए शान तो किसी के लिए ईमान हूँ मैं .. इतने लोगों की भावनाओं का प्रतीक बन मुझे फक्र होता है लेकिन उस दिन मुझे…
सीमापार से गोलीबारी शुरू होते ही गुलफाम , उसके भाई बहन और माँ बाप उस बंकर नुमा गड्डे में छिप गए । पर ये क्या बकरियां आज खुले में ही बंधी रह गयीं । गुलफाम के माँ बाप एक दुसरे को इसके लिए दोषी ठहरा रहे थे । आखिर गुलफाम…
कई महीनों बाद उसका फोन था । तुम्हारे जन्म दिन का गिफ्ट मैंने लिया था कैसे भिजवाऊँ के जवाब में ” मैं गिफ्ट सिर्फ उससे लेता जिसे दे सकूं ” कहकर चुप हुआ ही था कि पलट कर वो फिर बोली ‘ तो क्या करूं उसका ? ‘ … सोचा…