रक्तपात – कहीं नहीं होगा सिर्फ़, एक पत्ती टूटेगी! एक कन्धा झुक जायेगा! फड़कती भुजाओं और सिसकती हुई आँखों को एक साथ लाल फीतों में लपेटकर वे रख देंगे काले दराज़ों के निश्चल एकान्त में जहाँ रात में संविधान की धाराएँ नाराज़ आदमी की परछाईं को देश के नक्शे में बदल देती है पूरे आकाश […]