रश्मिरथी – रामधारी सिंह “दिनकर”

विषय: कविताएँ “रश्मिरथी में स्वयं कर्ण के मुख से निकला है-मैं उनका आदर्श, कहीं जो व्यथा न खोल सकेगे पूछेगा जग, किन्तु पिता का नाम न बोल सकेंगे, जिनका निखिल विश्व में कोई कहीं न अपना होगा, मन में लिये उमंग जिन्हें चिर-काल कलपना होगा। कर्ण-चरित के उद्धार की चिन्ता इस बात का प्रमाण है […]