शिक्षक दिवस: मोदी की कही 12 ख़ास बातें

मोदी के भाषण की 12 अहम बातें:

1) जो साल का सोचते हैं वो अनाज बोते हैं, जो दस साल का सोचते हैं वो फलों के वृक्ष बोते हैं, जो पीढ़ियों का सोचते हैं वो इंसान के निर्माण के बारे में सोचते हैं.

2) टीचर और बच्चे ही स्कूलों को साफ़ करें, और अफ़सर यदि हफ़्ते में एक दिन कुछ समय स्कूल को दें तो इससे राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण हो सकता है.

3) दिन में चार बार बच्चों का पसीना निकलना चाहिए. खेल-कूद और मस्ती भी करनी चाहिए.

4) बच्चों को महान लोगों का जीवन चरित्र पढ़ना चाहिए.

5) बच्चों को तकनीक से वंचित रखना एक सामाजिक अपराध है.

6) भारत पूरी दुनिया को अच्छे शिक्षक बनाने का सपना दे सकता है और भारत पूरी दुनिया को टीचर एक्सपोर्ट क्यों नहीं कर सकता?

7) बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए. एक लड़की की शिक्षा से दो परिवार शिक्षित होते हैं.

8) कहा जाता है कि व्यक्ति का अनुभव ही उसकी सबसे बड़ी शिक्षा है, लेकिन अनुभव भी अच्छी शिक्षा पर ही निर्भर करता है.

9) बिजली बचाना, अच्छा विद्यार्थी बनना, सफाई जैसी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना भी एक तरह की देश सेवा है.

10) बिजली उत्पादन महंगा, लेकिन बिजली बचाना बहुत सस्ता है. बच्चे बिजली बचाते हुए चांदनी रात का मजा ले सकते हैं.

11) हर काम ‘गूगल गुरु’ करता है. गूगल हमें जानकारी तो दे सकता है, लेकिन ज्ञान नहीं.

12) डिग्री के साथ हुनर होना ज़रूरी है. स्किल डेवलपमेंट का अवसर मिलना चाहिए.

 

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Article Courtesy BBChindi

About Prashant Sagar

The RIGHT was never right.There was nothing left in the LEFT. Thus here is a boy opening the gift boxes of horizons in search of a new ideology.

2 Comments

  1. I sincerely appreciate the idea of interaction with the students by sharing his own views and valuable suggestions to the young generation but then he should have done this on children’ s day not on teachers day. We were left out during all this program. I know the fact that our prime minister is felicitating some great teachers by acknowledging them with the national honor but there were thousands of other teachers who just had been waiting for few words of acknowledgment…….

    • Yep he should have addressed the teachers. But this is what he used to do in Gujarat every teachers’ day, so he just introduced it at the national level. 🙂

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